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पटना अस्पताल कांड: हर्निया-बवासीर के इलाज के नाम पर 6 महिलाओं की बच्चेदानी निकालने का आरोप

पाटन के एक निजी अस्पताल से एक वेहद गंभीर मामला सामने आया है, आयुष्मान भारत योजना के पैसों को हड़पने के चक्कर में एक निजी अस्पताल ने बिना अनुमति के 6 महिलों की बच्चेदानी (Uterus) निकाल दी गई।

पटना: बिहार की राजधानी Patna से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना के एक निजी अस्पताल पर आरोप लगा है कि हर्निया और बवासीर के इलाज के नाम पर 6 महिलाओं की बच्चेदानी (Uterus) निकाल दी गई

दरअसल, पूरा मामला यह है की पटना में एक निजी अस्पताल में जब महिलायें इलाज के जाती थी तो अस्पताल प्रशासन द्वारा एक अलग ही खेल खेला जा रहा था। खबरों के मुताबिक एक महिला को हर्निया की समस्या थी और जब वह इलाज के लिए इस अस्पताल में गई तब बिना उनकी अनुमति के और बिना उन्हें जानकारी दिए उनकी बच्चेदानी (Uterus) निकाल दी गई। यह मामला तब सामने आया जब महिला का मासिक धर्म बंद हो गया, तब महिला द्वारा दूसरे अस्पताल में अल्ट्र साउन्ड करवाया गया तब पता चला की उनकी बच्चेदानी (Uterus) निकाल दी गई है।

ऐसा ही एक मामला दूसरी महिला के साथ भी हुआ जो बवासीर (Piles) के इलाज के लिए उस अस्पताल में गई थी, फिर उनका भी मासिक धर्म बंद होने पर उन्होंने भी अल्ट्रसाउन्ड करवाया तो इस धोखाधड़ी का खुलाश हुआ। और यह सब कुछ हो रहा था आयुष्मान भारत योजना में मिलने वाली राशि को हड़पने के चक्कर में। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

इलाज के नाम पर बड़ी लापरवाही का आरोप

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि महिलाओं को हर्निया और बवासीर की समस्या के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन ऑपरेशन के बाद पता चला कि महिलाओं की बच्चेदानी ही निकाल दी गई है। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई थी और न ही उनकी सहमति ली गई।

ऐसे मामले आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करते है, यह दर्शाता है की कैसे कुछ चंद पैसों के लिए डॉक्टर भी आम इंसान की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करने से पीछे नहीं हटते है। डॉक्टर जिन्हें धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है, जब वो ही ऐसी घटिया हरकतों पर उतर आएंगे तब इंसान किसपर ही भरोसा करें।

जांच में सामने आए गंभीर तथ्य

प्रारंभिक जांच में इस मामले को गंभीर माना गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। अब जल्द से जल्द बस ऐसे डॉक्टर पर कार्यवाई की जाए और ऐसे अस्पताल बंद करवाए जाए तभी इस तरह के अपराधों पर रोक लगाया जा सकता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से मरीजों का भरोसा कमजोर होता है और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

अस्पतालों में मरीजों की सहमति और पारदर्शिता का पालन करना बेहद जरूरी है, लेकिन इस मामले में इन नियमों की अनदेखी होने की बात सामने आ रही है।

प्रशासन ने दिए कार्रवाई के संकेत

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

यदि आरोप सही साबित होते हैं तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

पटना के इस अस्पताल कांड ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला के साथ हुई इस कथित लापरवाही ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस मामले में असल जिम्मेदार कौन है।

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