Homeदेशखाने का तेल और रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी: भारत...
spot_img

खाने का तेल और रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी: भारत में बढ़ सकती है महंगाई

पाम ऑयल संकट का खतरा: इंडोनेशिया की नई नीति से भारत में बढ़ सकती है महंगाई, खाने का तेल और रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और इंडोनेशिया की नई B50 बायोडीज़ल नीति के कारण भारत में पाम ऑयल संकट की आशंका गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाम ऑयल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ खाने के तेल पर ही नहीं बल्कि साबुन, बिस्किट, नमकीन, शैम्पू और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करता है। देश में हर साल लगभग 95 लाख टन पाम ऑयल की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन बहुत कम है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

Palm Oil Crisis News
पेट्रोल-डीजल नहीं, अब समोसे, साबुन और शैम्पू हो जाएंगे महंगे! (AI Generated Image)

इंडोनेशिया की B50 नीति से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार इंडोनेशिया ने अपनी नई B50 नीति के तहत पाम ऑयल का अधिक उपयोग बायोडीज़ल बनाने में करने का फैसला किया है। इससे निर्यात के लिए उपलब्ध पाम ऑयल की मात्रा कम हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ेगा।

इसके साथ ही मलेशिया भी अपने बायोडीज़ल कार्यक्रम को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की उपलब्धता और कम हो सकती है।

भारत पर मंडरा रहा पाम ऑयल संकट, एक्सपर्ट पर रोक। (AI Generated Image)

खाने के तेल से लेकर साबुन-शैम्पू तक पड़ सकता है असर

भारत में कुल खाद्य तेल खपत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पाम ऑयल का है। इसका उपयोग घरों में खाना पकाने के अलावा बाजार में बनने वाले चिप्स, नमकीन, बिस्किट, केक, इंस्टेंट नूडल्स, मिठाइयों और फास्ट फूड में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

इसके अलावा पाम ऑयल का इस्तेमाल साबुन, शैम्पू, बॉडी वॉश, क्रीम, कॉस्मेटिक्स, डिटर्जेंट और टूथपेस्ट जैसे उत्पादों में भी होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो सकती हैं।

पाम ऑयल संकट से समोसे और साबुन तक हो सकते है महंगे (AI Generated Image)

वैश्विक परिस्थितियों से बढ़ सकता है संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने पाम ऑयल का इस्तेमाल ईंधन उत्पादन में बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। यदि यह स्थिति अगले 3 से 6 महीनों तक बनी रहती है, तो भारत में खाद्य तेल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

ऐसे में पाम ऑयल की सप्लाई पर निर्भर भारत के लिए यह स्थिति आने वाले समय में महंगाई बढ़ाने वाला बड़ा कारक साबित हो सकती है।

और ख़बर पढ़ें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

राजनीति