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होटल-रेस्टोरेंट में श्मशान का कोयला इस्तेमाल होने का आरोप: बिहार में चौंकाने वाला खुलासा

बिहार में श्मशान घाट से लाया गया कोयला होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने का आरोप। तंदूरी रोटी और चिकन बनाने में उपयोग की खबर से हड़कंप।

पटना: बिहार से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुछ होटल और रेस्टोरेंट में श्मशान घाट से लाया गया कोयला तंदूरी रोटी, चिकन और शादी-विवाह के खाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह खुलासा सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।


रिपोर्ट में क्या आया सामने?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्टर के सामने ही श्मशान घाट से चिता का कोयला निकाला गया। इतना ही नहीं, वहां मौजूद कुछ लोग हड्डियां चुनते हुए भी नजर आए।

बताया जा रहा है कि इस कोयले को इकट्ठा कर सस्ते दामों में बाजार में बेचा जाता है, जिसे बाद में होटल और ढाबों तक पहुंचाया जाता है।


तंदूरी खाना बन रहा इस कोयले पर?

सूत्रों के अनुसार यह कोयला खासकर उन जगहों पर इस्तेमाल हो रहा है, जहां तंदूरी आइटम बनाए जाते हैं, जैसे तंदूरी रोटी, चिकन, बारबेक्यू आइटम, शादी और समारोह का खाना। इससे यह सवाल उठता है कि लोगों की थाली में परोसा जा रहा खाना कितना सुरक्षित और स्वच्छ है।

Hotels used Shamshan Coal for cooking food in Bihar.


बड़े नेटवर्क की आशंका

रिपोर्ट में इस बात की भी आशंका जताई गई है कि यह कोई छोटा मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
श्मशान से कोयला इकट्ठा करने वाले लोग इसे सस्ते दामों में बेचते हैं और फिर यह सप्लाई चैन के जरिए विभिन्न होटल और रेस्टोरेंट तक पहुंचता है।


स्वास्थ्य और आस्था दोनों पर सवाल

यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कोयले का इस्तेमाल खाने में करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं। वहीं, धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसे बेहद संवेदनशील और आपत्तिजनक माना जा रहा है।


प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

मामले के सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस पूरे नेटवर्क की जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

बिहार में श्मशान के कोयले के इस्तेमाल का यह मामला बेहद गंभीर है। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ खाद्य सुरक्षा बल्कि सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।

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