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राजगीर में विश्व शांति स्तूप का 57वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

देश-विदेश के बौद्ध भिक्षुओं ने की पूजा-अर्चना, शांति और अहिंसा का दिया संदेश

राजगीर: बिहार की पर्यटन नगरी राजगीर के रत्नागिरी पर्वत पर स्थित विश्व शांति स्तूप का 57वां स्थापना दिवस रविवार को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदारनाथ गुप्ता मुख्य अतिथि तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। जापान से आए जापानी कंपनी सान्टोकू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी समारोह में भाग लिया।

स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह से ही गृद्धकूट पर्वत पर बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा-अर्चना और सामूहिक प्रार्थना की। इसके बाद विश्व शांति स्तूप के समीप बौद्ध परंपराओं के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। समारोह के दौरान भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, अहिंसा और विश्व बंधुत्व के संदेश को याद किया गया।

विश्व शांति स्तूप का निर्माण जापानी बौद्ध भिक्षु पूज्य निचिदात्सु फुजी, जिन्हें फुजी गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है, की प्रेरणा से कराया गया था। वर्ष 1965 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसकी आधारशिला रखी थी। इसके बाद वर्ष 1969 में गांधी शताब्दी वर्ष के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति वी. वी. गिरि ने इसका उद्घाटन किया था।

सफेद रंग का यह भव्य स्तूप राजगीर की प्रमुख ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान है। यह शांति, ज्ञान और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और बौद्ध श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। स्थापना दिवस समारोह के माध्यम से भगवान बुद्ध के विचारों और विश्व शांति के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

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