नोम पेन्ह (कंबोडिया): नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में नालंदा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों (Alumni) और वर्तमान विद्यार्थियों के लिए एक विशेष मिलन समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के वैश्विक एलुमनी नेटवर्क को सशक्त बनाना और विभिन्न देशों में रह रहे विद्यार्थियों तथा पूर्व छात्रों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना था. समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए.
भारत के राजदूत ने शिक्षा को बताया साझी प्रगति का आधार
कार्यक्रम में कंबोडिया में भारत के राजदूत महामहिम वनलालववना बविटलुंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. अपने संबोधन में उन्होंने भारत और कंबोडिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, संवाद और ज्ञान का आदान-प्रदान दोनों देशों के साझा विकास की मजबूत नींव हैं. उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया. साथ ही कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय दूतावास के सहयोग की भी प्रशंसा की गई.
नालंदा विश्वविद्यालय की नई शैक्षणिक पहल और वैश्विक पहचान
समारोह के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धियों, नई शैक्षणिक पहलों और उभरते शोध अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान के साथ जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख ज्ञान केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर रहा है. इस अवसर पर पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विश्वविद्यालय से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया.
भारत-कंबोडिया के शैक्षिक संबंधों को मिली नई मजबूती
विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस एलुमनी मीट को यादगार बना दिया. इस आयोजन ने न केवल भारत और कंबोडिया के बीच शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान की, बल्कि नालंदा विश्वविद्यालय के वैश्विक एलुमनी नेटवर्क को भी नई गति दी. कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय दूतावास, भारत के विदेश मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

