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UPI New Rule 2026: 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन में लग सकता है 1 घंटे का समय, फ्रॉड रोकने की तैयारी

UPI यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव प्रस्तावित, बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकती है नई सुरक्षा व्यवस्था

नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों UPI यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव (UPI New Rule 2026) सामने आ सकता है। Reserve Bank of India (RBI) ने प्रस्ताव रखा है कि 10,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर एक घंटे तक की देरी लागू की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर रोक लगाना है।

क्या है नया प्रस्तावित नियम?

प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 10,000 रुपये से अधिक का UPI ट्रांसफर किसी दूसरे व्यक्ति को करता है, तो पैसा तुरंत डेबिट तो हो जाएगा, लेकिन प्राप्तकर्ता के खाते में करीब 1 घंटे बाद क्रेडिट होगा। इस दौरान भेजने वाले को ट्रांजैक्शन रद्द करने का विकल्प भी मिलेगा।

हालांकि यह नियम केवल व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर लागू होने की संभावना है। दुकानों, QR कोड या ऑनलाइन भुगतान जैसे मर्चेंट पेमेंट पहले की तरह तुरंत होंगे।

क्यों लाया जा रहा है यह नियम?

RBI के अनुसार भारत में डिजिटल भुगतान फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक 28 लाख से ज्यादा डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए और नुकसान का आंकड़ा 22,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। ऐसे मामलों में अधिकांश धोखाधड़ी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए होती है, जिसमें लोग दबाव में आकर खुद पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

इसी समस्या को देखते हुए RBI ने “गोल्डन ऑवर” का कॉन्सेप्ट पेश किया है, यानी ट्रांजैक्शन के बाद का वह समय जब गलती या धोखाधड़ी का पता चलने पर भुगतान रोका जा सकता है।

छोटे ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा असर

विशेषज्ञों के अनुसार 10,000 रुपये से कम के UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह तुरंत होते रहेंगे। रोजमर्रा के खर्च जैसे किराना, कैब, ऑनलाइन खरीदारी या दुकान पर भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

और क्या बदलाव हो सकते हैं?

RBI अन्य सुरक्षा उपायों पर भी विचार कर रहा है, जैसे:

  • डिजिटल पेमेंट “Kill Switch” सुविधा
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए trusted person verification
  • अतिरिक्त authentication layer

इन कदमों से डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने की योजना है।

अभी लागू नहीं हुआ है नियम

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदलाव अभी प्रस्ताव (proposal) के रूप में है। इसे लागू करने से पहले बैंक और भुगतान संस्थानों के साथ चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यदि यह नियम लागू होता है, तो इससे UPI यूज़र्स को बड़ी रकम भेजने से पहले सोचने का समय मिलेगा और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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